Monday, February 10, 2014

एक नज़र फिर से...........


एक लफ्ज़ मोहब्बत का,
बस इतना  सा फ़साना है,
सिमटे तो दिल-ऐ -आशिकी,
फैले तो ज़माना है ,


जो नज़रों से बयां न कर पाये ,

वो होंटों से कह दो ,

एक नज़र फिर से इस दिल में,

प्यार कि भर दो,

वफाओं का हो जिसमे रंग,

ऐसी किसी मेहंदी से,

मेरी रूह को रंग दो,

धड़कता दिल जाये थम,

ऐसी कोई गुज़ारिश कर दो ,

मोहब्बत का कोई ऐसा राग सुनाओ,

जो मेरे तन - मन को तुम्हारा कर दे।



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