Monday, February 10, 2014

कभी मिलो तो तुमसे .............



कभी मिलो तो तुमसे पूछे,

बिना आये कैसे जाते हो,

जिन राहों पर हो ही नहीं तुम,

वहाँ नज़र क्यों आते हो,

कहाँ से लाये ऐसी खुश्बू,

मन को जो महका देती है,

इस प्रकृति के कण-कण में तुम,

खुद को कैसे समाते हो,

अपने ही टुकड़ो को हमने,

बड़ी जतन से संभाला था,

उनको यों बिखरा कर अब,

तुम क्यों इतना मुस्कुराते हो।


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